सोमवार, 3 जनवरी 2011

सौन्दर्य की देवी: पामेला एंडरसन

Pamela Anderson:Crowned by TGM
(Photo Credit: The Times of India)
(English translation)
पामेला देवी को भारतीय नारी के परिधान में देखकर, और उनके हिन्दी संभाषण से प्रभावित होकर, मेरी कलम ने अँग्रेज़ी में लिखने से इन्कार कर दिया.

देवी जी अमरीका नामक दूर देश से भारतीय पुरुषों के उद्धार हेतु आगमित हुई थी. अन्यथा उन असंतुष्ठ पुरुषों को मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती. ईश्वर उन्हें यह कहकर कि “वत्स, तुम्हारे जीवन की आकांक्षाएँ अभी पूर्ण नहीं हुई है,” पुनः धरा पर भेज देते.

वैसे जनसामान्य को मात्र इतनी ही सूचना थी कि पामेला जी बिग्ग बॉस नामक अत्यंत ही निरर्थक तमाशे में भाग लेने हेतु तीन दिन के लिए पधारी हैं.


देवी जी के रूप का जितना वर्णन किया जाए, उतना ही कम है. उन्हें देखकर लगता है मानो कमलिनी कुल वल्लभ (सूर्य देव) का ह्रिदय स्वर्ग की किसी अप्सरा पर आ गया होगा, और उन दोनों के संयोग से जो भ्रूण उत्पन्न हुआ होगा, उसे उनहोंने पामेला की माँ के गर्भ में रोप दिया होगा. जिसके परिणामस्वरूप, नौ माह पश्चात, सूर्य के समान तेज वाली कन्या का जन्म हुआ होगा.

पामेला जी के सुनहरे केश, सूर्य की किरणों की भाँति, रात्रि को दिवस में परिवर्तित करने की  क्षमता रखते हैं. जब वे अंगुलियों से अपनी लटों को विशेष अंदाज़ में संवारती हैं, तो बड़ी ही मनमोहक प्रतीत होती हैं. उनके मत्स्य समान नेत्र, धनुष समान भृकुटि, और गुलाब की पंखुरी से अधर बिना कुछ कहे भी उनकी कोमल भावनाओं को व्यक्त कर देते है. और जब वे बोलती हैं तो उनका मधुर स्वर मंदिर की छोटी सी घंटी की भाँति ह्रिदय में बज उठता है. उनका गठा हुआ भरा-पूरा चंदन सा तन, विशेषकर अधढके घड़े समान स्तन एवं नितंब उन्हें कामुकता की अविवादित देवी घोषित करते हैं.

विमान से उतरने के पश्च्यात जैसे ही उन्होंने भारत की महान धरती पर, सुरुचिपूर्ण पादुकाओं में जकड़े अपने कोमल चरण रखे, उनका बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया गया. मुंबई के व्याकुल पुरुष अपनी “यत्र नार्यस्तु पूज्‍यते, रमन्ते तत्र देवता” की परंपरा का पालन करते हुए, भक्ति और श्रद्धा से भावविभोर होकर, उन्हें स्पर्श करने को उतावले हो उठे. देवी जी को उनके अंगरक्षकों ने बड़ी कठिनाई से भक्तजनों की उत्तेजना से बचाया.

पूरे भारतवर्ष में पामेला-पामेला की गूँज मच गयी. हिंदू, मुसलमान, सिख, और ईसाई, सब आपसी बैर भुला कर एक स्वर मे पुकार उठे—पामेला!

चिकित्सक, अभियंता, पंडित, बनिया, मोची, नाई, सब अपना व्यवसाय एवं व्यसन त्याग कर दूरदर्शन पर नेत्र गड़ा कर कराह उठे—पामेला!

प्रसिद्ध बलॉगर, श्री अरनब रे, अमरीका में रहते हुए भी अपने देशवासियों के सौभाग्य पर कृत-कृत हो कर लिख बैठे—पामेला पर एक व्यक्तिगत, मर्मस्पर्शी आलेख!

बलॉगर्स के ताजवाले बादशाह श्री राकेश झुनझुनवाला, पहले तो पामेला देवी के आगमन के समाचार से अत्यंत उल्लासित दिखाई दिये थे, परंतु बाद में वे बर्खा दत्त - नीरा राडिया घोटाले की कलई खोलने में व्यस्त हो गये.

हे रूप की देवी पामेला, आपने दूरदर्शन पर अपना वैभव दिखाकर भारतवर्ष को कृतार्थ कर दिया! अब जब  यहाँ के तृप्त संतुष्ट पुरुषों को मोक्ष प्राप्त होगा, तो आशा करते हैं कि भारत की जनसंख्या की समस्या, अल्प परिमाण में ही सही, कुछ तो कम होगी.

9 टिप्‍पणियां:

  1. अजी आपने क्या कम लिखा है.ऐसा वर्णन जैसे कामाईनी हो..



    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति. आभार

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  2. अत्यधिक रोचक वर्णन, चित्त प्रसन्न हो गया, और चूँकि किशोरावस्था के आगमन से ही मैंने अपने आपको पामेला प्रेम में व्याकुल पाया, अतः मैं आपके विचारों का अनुमोदन करता हूँ.

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  3. शुक्रिया ब्रिजेश! अच्छा लगा यह जानकर कि अपने पढ़ा! आपकी हिंदी सराहनीय है :-)

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  4. धन्यवाद, प्रत्युत्तर में विलम्ब के लिए क्षमा-प्रार्थी हूँ, गत पखवाड़े मैं आटा चक्की नहीं पढ़ पाया, कोटा की भीषण गर्मी में झुलस रहा था, यही मना रहा हूँ के बारिश अच्छी हो जाए तो कोटा के उम्दा झरनों का आनंद उठाया जाए.

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  5. @Brijesh: चलो क्षमा कर दिया! क्या आप चकपक.कॉम वाले ब्रिजेश हैं?

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  6. क्या मेरा, क्या तेरा... सब पामेला

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    1. सच है... क्या मैला क्या थैला... सब पामेला!

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