बुधवार, 27 जुलाई 2011

चोखी रसोई

(मेरे पिता श्री पुरुषोत्तम पाण्डेय की लिखी कहानी. आप उनकी अन्य रचनाएँ http://purushottampandey.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं)

सात गावों के पंडितों का महा-सम्मलेन आयोजित किया गया. व्याकरण से लेकर वेदों तक की चर्चाएं हुई. चूँकि समय बहुत तेजी से बदल रहा है, और लोग धर्म की आस्थाओं से विमुख होते जा रहे हैं, ये बड़ी चिंता का विषय रहा. कलिकाल में जहाँ भौतिकवाद का ऐसा प्रभाव हो गया है कि आम आदमी बिना मेहनत किये अवैध तरीकों से घन कमाना चाहता है, इसके लिए धर्म अधर्म की भी कोई सोच नहीं रही है.

सम्मलेन में उपस्थित शास्त्रीगण/महापंडितों ने गहरी चिंताए जताई कि अगर इस अधोपतन के क्रम को रोका नहीं गया तथा संस्कारित नहीं किया गया तो निश्चय ही धर्म का स्वरूप विद्रूप हो जाएगा.

एक रामायणी विद्वान ने तो रामचरितमानस में कलिकाल का उद्धरण करते हुए घोर निराशा का चित्रण कर डाला. सारी चर्चा में ‘धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,’ जैसे नारे बार बार लगते रहे. पर किसी ने धार्मिक कर्मकांडों में आई विकृतियों अथवा पाखंडों पर कोई चर्चा करना ठीक नहीं समझा. क्योंकि सभी लोग किसी न किसी रूप में अपनी दैनिन्दिनी में अंधविश्वासों व पाखंडों में लिप्त रहते हैं. "हम सब पाखंडी हैं," यह कहने की हिम्मत किसी में नहीं रही. बिगड़ी हुई मान्यताओं को बदलने का साहस भी नहीं कर पा रहे थे. ‘सत्यम वद, धर्मं चर,' जैसे आदर्श तो केवल पोथी के बैगन रह गए हैं. इनको न छेड़ा जाये तो ही अच्छा है. क्योंकि सभी लोग सुबह से शाम तक सैकड़ों झूठों का बोझ ढोते चलते हैं. लेकिन उपदेश तो दे ही सकते थे. नहीं दिये.

मंगलवार, 3 मई 2011

लगता नहीं है जी मेरा एबटाबाद में

बिन लादेन का आखिरी पड़ाव (CNN के सौजन्य से)
लगता नहीं है जी मेरा एबटाबाद में,
किसकी बनी है आलम-ए-नापायेदार में,
कह दो जेहादियों से अमरीकियों से ना डरें,
इतनी जगह कहाँ है जेल-ए-ग्वातेनामो में.

उम्र-ए-दराज़ मांग कर लाये थे चार दिन,
दो जेहाद-अफजाई में कट गए दो सर बचाने में.
कितना है बदनसीब "बिन लादेन" दफन के लिए,
दो गज ज़मीन भी ना मिली कू-ए-यार में.

(बहादुर शाह ज़फर से क्षमा याचना सहित)
Read the original couplets here 

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

मायाजाल

ब्रह्माजी और नारद मुनि
ब्रह्माजी अपने चारों हाथों में कुछ कुछ थामे हुए, नियमित वस्त्र एवं आभूषणों में सुसज्जित, कमलासन पर विराजित हो, सरस्वती से गाना सुन रहे थे, तभी अचानक, "नारायण, नारायण," कहते हुए नारद मुनि आ धमके.

सरस्वती अपना गाना-बजाना बंद करके बोली, "लो आ गए आपके मानसपुत्र," और वहां से प्रस्थान कर गयी.

"कहिये नारद, कैसे आना हुआ?" ब्रह्माजी आशंकित स्वर में बोले. 

रविवार, 27 मार्च 2011

करुणानिधि जी की आरती

English Version
यह आरती प्रतिदिन प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में या फिर सायंकाल सूर्यास्त के पश्चात् गायी जानी चाहिए. ऐसा करने से घर के पुरुषों को करुणानिधि जी की भांति करोड़ों की संपत्ति और साथ ही अनेक पत्नियों का सुख प्राप्त होता है. करुणानिधि जी कलाईनार, अर्थात कला के विद्वान के नाम से भी जाने जाते हैं. संभवतः यह पैसे कमाने की कला से सम्बंधित है. 

गुरुवार, 10 मार्च 2011

पागल लड़की का प्रेमगीत


सिल्विया प्लेथ  (1932-1963)
सिल्विया प्लेथ द्वारा लिखी कविता, "मैड गर्ल्स लव सॉन्ग" का हिंदी अनुवाद:
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