रविवार, 8 सितंबर 2024
पिता के पत्र | एपिसोड 19 | पुरानी दुनिया के बड़े-बड़े शहर | The Great Cities Of The Ancient World
इस पत्र में, जवाहरलाल नेहरू ने प्राचीन दुनिया के बड़े शहरों के बारे में बताया है। उन्होंने समझाया कि प्राचीन सभ्यताएँ मुख्यतः नदियों के किनारे और उपजाऊ घाटियों में बसी थीं, जहाँ पानी और भोजन की प्रचुरता थी। नेहरू ने बाबुल, नेनुवा, और असुर जैसे प्राचीन शहरों का उल्लेख किया, जो अब मिट्टी और बालू के नीचे दब चुके हैं और सिर्फ खुदाई के दौरान उनके खंडहर मिलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ इन पुराने शहरों के ऊपर नए शहर बस गए, लेकिन धीरे-धीरे वे भी वीरान हो गए और मिट्टी और धूल के नीचे दब गए। उन्होंने दमिश्क का उदाहरण दिया, जो आज भी एक प्राचीन और जीवित शहर है, और संभवतः दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है।नेहरू ने भारतीय प्राचीन शहरों का भी उल्लेख किया, जैसे इंद्रप्रस्थ, जो दिल्ली के पास था और अब उसका कोई निशान नहीं है, और बनारस (काशी), जो दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। उन्होंने इलाहाबाद, कानपुर, पटना और चीन के पुराने शहरों का भी जिक्र किया, जो नदियों के किनारे स्थित हैं, लेकिन ये इतने पुराने नहीं हैं। Tags Jawaharlal Nehru Indira Gandhi letters Pita ke Patra Putri ke Naam by Jawaharlal Nehru Letters from a Father to his Daughter Nehru ke patra Indira ko Nehru’s Letters to Indira पाठ 19 पुरानी दुनिया के बड़े-बड़े शहर अध्याय १९ पुरानी दुनिया के बड़े-बड़े शहर Lesson 19 The Great Cities Of The Ancient World
शुक्रवार, 6 सितंबर 2024
पिता के पत्र | एपिसोड 18 | शुरू का रहन-सहन | The Early Civilizations
बुधवार, 4 सितंबर 2024
पिता के पत्र | एपिसोड 17 | सरग़ना राजा हो गया | The Patriarch Becomes a King
राजा यह भूल गए कि लोग उन्हें केवल इसलिए चुनते थे क्योंकि वे सबसे समझदार और अनुभवी व्यक्ति माने जाते थे, ताकि वे देश का बेहतर प्रबंधन कर सकें। लेकिन उन्होंने खुद को भगवान का चुना हुआ मानकर यह समझ लिया कि उनके शासन का अधिकार ईश्वर से मिला है, जिसे उन्होंने "राजाओं का दिव्य अधिकार" कहा।
इतिहास में, नेहरू ने समझाया कि कैसे इंग्लैंड, फ्रांस और रूस जैसी जगहों पर लोगों ने अपने राजाओं को उनकी तानाशाही के कारण उखाड़ फेंका। उन्होंने इंग्लैंड के राजा चार्ल्स प्रथम को हटाने और फ्रांस और रूस में बड़ी क्रांतियों का जिक्र किया, जहां लोगों ने अपने राजाओं को निष्कासित कर दिया।
नेहरू ने बताया कि अब ज्यादातर देशों में राजा नहीं हैं और वे गणराज्य बन गए हैं, जहां लोग अपने नेताओं को चुनते हैं। हालांकि, भारत में अभी भी राजा, महाराजा और नवाब हैं, जो जनता से वसूले गए टैक्स का दुरुपयोग करके शाही जीवन जीते हैं, जबकि उनकी प्रजा गरीबी में जीवन व्यतीत करती है और उनके बच्चों के लिए स्कूल तक नहीं हैं।
Tags Jawaharlal Nehru Indira Gandhi letters Pita ke Patra Putri ke Naam by Jawaharlal Nehru Letters from a Father to his Daughter Nehru ke patra Indira ko Nehru’s Letters to Indira पाठ 17 सरग़ना राजा हो गया अध्याय १७ सरग़ना राजा हो गया Lesson 17 The Patriarch Becomes a King
सोमवार, 2 सितंबर 2024
पिता के पत्र | एपिसोड 16 | सरग़ना का इख़्तियार कैसे बढ़ा | The Patriarch - How He Developed
इस पत्र में, जवाहरलाल नेहरू यह समझाते हैं कि प्राचीन मानव जातियों में संपत्ति और नेतृत्व का विकास कैसे हुआ। प्रारंभ में, सभी चीजें पूरी जाति की होती थीं, और किसी का व्यक्तिगत स्वामित्व नहीं होता था, यहां तक कि सरगना का भी नहीं। सरगना का काम केवल जाति की संपत्ति की देखभाल करना था। लेकिन जैसे-जैसे सरगना की ताकत बढ़ी, उसने जाति की संपत्ति को अपना मानना शुरू कर दिया। इस तरह, व्यक्तिगत स्वामित्व की अवधारणा का जन्म हुआ।
समय के साथ, सरगना का पद मौरूसी हो गया, यानी उसकी जगह उसके परिवार का ही कोई सदस्य, जैसे उसका बेटा या भाई, लेने लगा। इस बदलाव के साथ, संपत्ति भी सरगना के परिवार की मानी जाने लगी। इस प्रकार, समाज में अमीर और गरीब का अंतर पैदा हुआ, क्योंकि सरगना ने जाति की संपत्ति पर अधिकार जमाना शुरू कर दिया। नेहरू अगले पत्र में इस विषय पर और अधिक लिखने की बात कहते हैं। Tags Jawaharlal Nehru Indira Gandhi letters Pita ke Patra Putri ke Naam by Jawaharlal Nehru Letters from a Father to his Daughter Nehru ke patra Indira ko Nehru’s Letters to Indira पाठ 16 सरग़ना का इख़्तियार कैसे बढ़ा अध्याय १६ सरग़ना का इख़्तियार कैसे बढ़ा Lesson 16 The Patriarch - How He Developed
रविवार, 1 सितंबर 2024
पिता के पत्र | एपिसोड 15 | खानदान का सरगना केसे बना | The Patriarch - How He Began
पत्र का सारांश - Summary of the letter
इस पत्र में जवाहरलाल नेहरू अपनी बेटी इंदिरा को समझाते हैं कि समाज में सरगना (पितृसत्ता) की शुरुआत कैसे हुई। पहले के समय में, जब समाज सरल था, सब लोग बराबर थे और मिल-जुलकर काम करते थे। खेती और नई गतिविधियों के आने के बाद, किसी को काम बाँटने और संगठन करने की ज़रूरत पड़ी, और यह ज़िम्मेदारी सबसे बुजुर्ग व्यक्ति को दी गई, जिसे सरगना या पितामह कहा गया।
शुरुआत में, सरगना भी बाकी लोगों की तरह काम करता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने संगठन का काम करने के लिए शारीरिक श्रम करना छोड़ दिया और दूसरों से अलग हो गया। सरगना का काम सिर्फ संगठन करना और लोगों को काम का आदेश देना रह गया। समय के साथ, जब लड़ाइयाँ होने लगीं, सरगना का महत्व और भी बढ़ गया क्योंकि बिना नेता के लड़ाई संभव नहीं थी।
सरगना ने अपनी मदद के लिए और लोगों को भी संगठन करने के काम में लगाया, जिससे समाज दो हिस्सों में बंट गया—एक वो जो संगठन का काम करते थे और दूसरे वे जो सामान्य श्रम करते थे। इस तरह समाज में असमानता की शुरुआत हुई, और सरगना का दबदबा बढ़ता गया। अगले पत्र में नेहरू और विस्तार से इस प्रक्रिया को समझाएंगे।
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पाठ 15 ख़ानदान का सरग़ना कैसे बना
Lesson 15 The Patriarch - How He Began