गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

बेटा, लाईफ जैकेट पहनो: एक नन्हे बालक की कहानी

(English version: Beta, Lifejacket Pehno: The Story Of A Little Boy)

नन्हा बालक 
एक बहुत ही सुन्दर और प्यारा सा लड़का था. उसके घुंघराले बाल, गोरे गोरे गाल, और गालों पर पड़ने वाले गड्डे मन को मोह लेते थे. उसकी उतनी ही प्यारी सी एक बहन भी थी. उनकी माँ एक सुदूर प्रदेश से थी, जहाँ स्त्रियों को समाज में पुरुषों के ही समान स्वतंत्रता एवं अधिकार प्राप्त थे. माँ ने अपनी मर्जी से एक महाताल के तैराकी शासक परिवार के राजकुमार से विवाह किया था. विवाह के पश्चात् उसे अपने ससुराल की परंपरा और रीति रिवाज़ के अनुसार रहना पड़ा, परन्तु उसने कभी शिकायत नहीं की क्योंकि वह अपने पति से बेहद प्यार करती थी और उनके पति भी उनका उतना ही आदर करते थे.

दोनों भाई बहन बचपन से लेकर बड़े होने तक घर के पिछवाड़े छोटे से बच्चों वाले स्विमिंग पूल में ही तैरते थे. सुरक्षा कारणों से उन्हें महाताल में तैरने की अनुमति नहीं थी.
  
दुर्भाग्यवश, बच्चों के सिर से पिता का साया जल्दी ही उठ गया। जबकि आम माताएं अपने बच्चों से कहती थी, "बेटा, स्वेटर पहनो," सुदूर प्रदेश से आई वह माँ अपने बेटे से कहती थी, "बेटा, लाईफ जैकेट पहनो." माँ की चिंता का कारण यह था कि उस लड़के के पिता की ही नहीं बल्कि चाचा और दादी की मृत्यु भी उस तालाब में तैरते हुए ही हुई थी. उसकी दादी की मृत्यु के बाद उसके पिता टीम C के लीडर बनकर महाताल के महाराज बने थे, परन्तु अल्पकाल में ही वहां का खतरनाक व भयावह पानी उन्हें निगल गया. पिता की मृत्यु के समय शोकग्रस्त माँ और बेटा दोनों तैरना नहीं जानते थे. बालक टीम लीडर बनने के लिए वैसे भी बहुत छोटा था. 

एक सशक्त नेता के अभाव में, टीम C के सदस्य मिलकर तैरने की जगह, एक दुसरे को डुबाने लगे. ऐसे समय में उनकी प्रतिस्पर्धी टीम B ने महाताल पर विजय प्राप्त कर ली.        

महाताल का फिर भी भला नहीं हुआ. क्योंकि इस समय सभी टीमों के सदस्य महाताल के प्रति अपना कर्तव्य भूल चुके थे. महाताल की खुशहाली के लिए कार्य करने के स्थान पर, वे लोग तालाब को लूट कर अपने अपने महलों में धन दौलत इकठ्ठा करने लगे, और जब महलों में जगह नहीं बची तो अपने परिवार वालों के नाम पर जगह जगह जमीन खरीदी, और देसी-विदेशी बेंकों में सारा धन छुपा दिया.    

तितर बितर होती टीम C ने नन्हे लड़के को अपना लीडर बनाना चाहा, परन्तु उसे तैरना ही नहीं आता था. फिर उन्होंने उसकी माँ को मनाया. हालाँकि माँ को भी तैरना नहीं आता था, पर वो मान गयी क्योंकि प्रतिस्पर्धी टीम के लोग उसे उसके पति के समय में हुए बोफोर्स पिचकारी की खरीद फरोख्त में हुई हेरा फेरी के लिए परेशान कर रहे थे. सुदूर देश से आई उस महिला ने महाताल के किनारे किनारे छिछले पानी में तैरना शुरू कर दिया और शीघ्र ही सीख भी गयी. परन्तु विपक्षी तैराकों ने उसके महारानी बनने पर, विदेशी होने के कारण, आपत्ति जताई. तब सब की सलाह पर उस बालक ने अभ्यास करना शुरू किया.

"मम्मी, ये पानी बहुत गन्दा है," बेटा आहत स्वर में बोला.

गंदा ही नहीं, उस तालाब में शार्क, जेलीफ़िश, और कई तरह के खतरे छुपे थे. उनकी टीम के कुछ शातिर खिलाडियों ने मिलकर बालक को लाइफ जैकेट के साथ साथ जलरोधी एवं वायुरुद्ध वस्त्र पहनाये और बीच तालाब में जलमहल में ले गए. वे तैराक बालक को कभी कभी ही तैरने के लिए बाहर लाते थे, और पूरे वक्त उसे दायें, बाएं, और नीचे से सहारा देते रहते थे. बालक ऊपर-ऊपर तैरने का नाटक भर करता था.

बालक की तैराकी की पोशाक पूरी तरह गीली भी नहीं हुई थी, पर टीम C ने उसे व उसकी माँ को अपना नेता करार दिया. और साथ ही यह दावा भी किया कि यह बालक महाताल को गंदगी एवं कंगाली से बचायेगा. हालाँकि वह बालक चालीस की उम्र पार कर चुका था, फिर भी वह अन्य वृद्ध तैराकों के समक्ष बच्चा ही था.

इस बालक और उसकी माँ को अघोषित नेता बना कर एक प्लास्टिक के पुतले को महाराज घोषित कर दिया गया. जनता के सामने वोट मांगने माँ और बेटा जाते थे और टीम की नाकामी पर कटाक्ष पुतला झेल लेता था. वह बिना हाथ पैर चलाये ही तैरता रहता था.

बालक ने कहने को तो तैराकी जीवन अपना लिया, पर वह कभी कभी ही अपने करतब दिखाने के लिए बाहर निकलता था और वो भी लाइफ जैकेट पहनकर. महाताल की एक अजीब परंपरा थी. वहां बलात्कारी, खूनी-कातिल, और रिश्वतखोरों की तो इज्जत होती थी, परन्तु यदि कोई किसी लड़की या महिला से प्रेम सम्बन्ध रखे तो लोग उस पर थू-थू करते थे. इस वजह से उस बालक को किसी से प्रेम करने की अनुमति नहीं थी.

कई लोग शिकायत करते रहे कि लड़का गहरे पानी में नहीं तैरता और वो तालाब की सफाई व खुशहाली के लिए कुछ नहीं करता. करता भी क्यों, जब उसे प्यार अधिकार, मान, सम्मान, सामान, आराम सब ऊपर-ऊपर तैरने से ही मिल रहे थे?

सुदूर प्रदेश से आई इस माँ और उसके बच्चों को जो भी प्यार सम्मान मिल रहा था, उसके एवज में वे बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे. उनकी वजह से ही टीम C के सदस्य मिलकर तैर रहे थे और महाताल के सर्वस्व बने हुए थे. उन्हें लोगों की खुशहाली के लिए गहरे पानी में तैरने की मेहनत नहीं करनी पड़ रही थी. लोग तो इस परिवार के सुन्दर सुन्दर मुखड़े देखकर ही खुश थे. और टीम के सदस्य तालाब से धन चुरा चुरा कर अपनी सात पीढ़ियों के लिए बंदोबस्त में लगे थे.

हाल ही में इस बालक ने अपने कुछ तैराकी करतब CII के सदस्यों को दिखाए. वहां उसने अपनी लुभावनी आवाज़ में  'बा, बा, ब्लैक बीज़' और 'गिरीश फ्रॉम गोरखपुर वेंट टू मुंबई' भी सुनाया, जो सभी को बहुत अच्छे लगे. 

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत दिनों से इंतजार कर रहा था आपकी रचना का। चलिए देर आए दुरूस्त आए....

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद! अगली पोस्ट जल्दी लिखने की कोशिश करूंगी :-)

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  2. लाजवाब ! सुन्दर पोस्ट लिखी आपने | पढ़ने पर आनंद की अनुभूति हुई | आभार |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. बहुत दिनों बाद .......सटीक आलेख ....जल्दी जल्दी आया कीजिये ,पढने में मज़ा आता है .

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  4. इशारों इशारों में आप ने बहुत कुछ कह डाला. वैसे पब्लिक यह सब समझती तो है.

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    1. आपने सही कहा पब्लिक सब समझती है, पर फिर भी नेताओं के झांसे में आ जाती है!

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  5. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के (२८ अप्रैल, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - इंडियन होम रूल मूवमेंट पर स्थान दिया है | हार्दिक बधाई |

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  6. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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